
Pradeep Bakshi (Pintu)
पिंटू से पीछे भी पिंटू, पिंटू से आगे भी पिंटू,
पिंटू की तुलना पिंटू से ही करो, कभी अच्छी और कभी बहुत अच्छी करो।
कभी आँखों से समझा देता है, कभी इशारों से बता देता है,
इसकी बातों में है निराला अंदाज़, हम सबको प्यारी इसकी मुस्कान है।इसलिए…
पिंटू की तुलना पिंटू से ही करो…
सबके साथ इसकी अलग डोर है, कहीं प्रिंस, कहीं टाइगर, कहीं प्रदीप और कहीं बेटा,
यही इसकी अद्भुत पहचान है ।
करता है मदद सबकी, किसी को नहीं समझता कमज़ोर है ,
यही इसकी असली पहचान है।
इसलिए …पिंटू की तुलना पिंटू से ही करो, कभी अच्छी और कभी बहुत अच्छी करो।
पति,बेटा, भाई, दोस्त —इन सबमें खरा निकला यही स्रोत है, इसलिये…
पिंटू की तुलना पिंटू से ही करो…
हमें आज फिर इकठ्ठा करने वाला वही बलवान है,
पति,भाई, बेटा और दोस्त का यह उत्तम प्रमाण है।
याद रहेंगे हमेशा, बीते पल तेरे साथ,
हम भुला न सकेंगे, तू हमेशा हमारे रहेगा हमारे पास –
इस बात का हमें यकीन है।
इसीलिए,
पिंटू की तुलना पिंटू से ही करो,
कभी अच्छी और कभी बहुत अच्छी करो।
By – Cmdt. Navdeep
Navdeep, your poem is so beautiful and apt for our little brother. I miss him a lot but then I think he is still with us, in our smiles, tears and memories.